घर से निकले थे उजले कुर्ते मेंऔर ज़माने के दाग़ ले आएजब कलेजे में ठंड चाही तोऔर छाती में आग ले आए
घर से निकले थे उजले कुर्ते मेंऔर ज़माने के दाग़ ले आए
जब कलेजे में ठंड चाही तोऔर छाती में आग ले आए