आपके चेहरे की झुर्रियों में

मेरा बचपन छिपा है बाबूजी,

मेरी पहली झलक, वो किलकारी

आज भी याद है न बाबूजी?


याद है पहली बार झगड़ा था?

रोते-रोते मैं रात सोया था,

आप तो सारी रात जागे थे

आप भी रोये थे न बाबूजी?


मेरी ख़ामोशियों को सुनते थे,

अपनी ख़ामोशियों से कहते थे,

मेरी आँखें भी झट से पढ़ते थे,

कैसे करते थे जादू, बाबूजी?


आज मुझसे भी कोई झगड़ा है,

मैं भी तो सारी रात जागा हूँ,

मैं भी वैसे ही छिप के रोया हूँ,

आप सा हो रहा हूँ बाबूजी!


-साहिल