हम नहीं ज़ख्म चारागर को दिखाने वाले

पी गए अश्क सब आँखों से बहाने वाले


कुछ तो ख़ुद ही नहीं सैलाब से बचना चाहा

कुछ डुबा कर के गए हमको बचाने वाले


मुझको हाथों की लकीरों का कुछ यक़ीन नहीं

मेरी तक़दीर में हैं हाथ छुड़ाने वाले


मुझे अपना ना कहो और कोई नाम रखो

मेरे अपने थे सभी मुझको मिटाने वाले


- साहिल