माना टूटे हुए सितारे हैं
फिर भी जलते हुए अंगारे हैं
आज कल कश्तियाँ डुबोती हैं
हम तो तूफ़ान के सहारे हैं
स्याह रातों से भी जो काले थे
वो सुरंगों से दिन गुज़ारें हैं
जो नहीं हैं वो बन के रहते हैं
सब मुखौटे नहीं उतारे हैं
कौन ख़ुशियों को रोये, जाने दो
अश्क़ ख़ुशियों के भी तो खारे हैं
- साहिल
Twitter: @Saahil_77
