कुछ आँसू मोती, कुछ खारे,
कुछ पीर में डूबे अंगारे,
कुछ जैसे टप से ओस गिरे,
कुछ ठहरे पलकों के द्वारे l
कुछ घन वियोग से भरे-भरे,
परिजन बिछोह से डरे-डरे,
कुछ चिता अनल पर भी बरसे,
कुछ गंगा तट पर झरे-झरे l
पर कुछ हैं जो बस बहते हैं,
फीके-फीके से रहते हैं,
जिनमे पीड़ा-संताप नहीं,
जाने उनको क्या कहते हैं?
- साहिल


