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आईने


आईने झूठ जो दिखाते हैंआज सोने में मढ़े जाते हैंकई अफ़वाहों की तरक़्क़ी हुईआज ख़बरों में गिने जाते हैंमिरे क़ातिल को बुरा लगता हैहम जो चुपचाप मरे जाते हैंदोस्त बचपन के सब ख़िलाफ़ हुएखेल नफ़रत के उन्हें भाते हैं

-साहिल

(Twitter: @Saahil_77)

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