खींच डाले हाशिये, अच्छा किया
फ़ासले रहने दिए, अच्छा किया
यूँ भी तेरे दर से ना जाते कहीं,
पर क़तर के रख लिए, अच्छा किया
हम बुरे को भी बुरा कहते नहीं,
ज़ुल्म जिसने भी किये, अच्छा किया
आईने अब सारे झूठे हो गए,
आदमी से हो लिए, अच्छा किया
-साहिल


खींच डाले हाशिये, अच्छा किया
फ़ासले रहने दिए, अच्छा किया
यूँ भी तेरे दर से ना जाते कहीं,
पर क़तर के रख लिए, अच्छा किया
हम बुरे को भी बुरा कहते नहीं,
ज़ुल्म जिसने भी किये, अच्छा किया
आईने अब सारे झूठे हो गए,
आदमी से हो लिए, अच्छा किया
-साहिल