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आफ़ताब


प्यार से इतना हम जनाब मिलेफिर भी उल्टे हमें जवाब मिले

मेरी मासूमियत बढ़ी उतनीलोग जितने हमें ख़राब मिले

यूँ ही कितनी किताब पढ़ डालीजाने किसमें कोई गुलाब मिले

जिनके सीने में घुप अंधेरा थाहमको ऐसे भी आफ़ताब मिले

- साहिलTwitter: @Saahil_77

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