बाघ नोंचता मांस
जब भूख से
उखड़े साँस
साँप उगले ज़हर
जब ख़तरा
हो सिर पर
गिद्ध का इंतज़ार,
मरे शिकार, हो
लाश पे सवार
जो भूख बिन, खाये
ज़हर फैलाये
ज़िंदा निगल जाये
इंसान कहलाये...
कहो, आदम से बर्बर,
दुष्ट, आदमखोर
क्या होगा कोई और?
- साहिल
Twitter: @Saahil_77
