तुम मेरी वो कविता थी

जिसे में लिखकर भी पढ़ न पाया

जिसे अलंकारों में सजाकर भी देख न पाया

जिसे चाहकर भी में कुछ कह न पाया

जिसे खोकर भी में पा न पाया


जज़्बात मेरे, मेने नज़्मो में लिखे पर तुम पढ़ न पाई

हालात मेरे,मेने रातो की कहानियों में सुनाये पर तुम समझ न पाई

खामोशिया मेरी, मेने बंद कमरों में चीखकर सुनाई पर तुम सुन न पाई

दर्द मेरा,मेने तुमसे प्यार करके जताया पर तुम प्यार कर न पाई।।


किसी को ईश्क़ तो किसी को ज़िस्म चाहिए

किसी को प्यार तो किसी को व्यपार चाहिए

किसी को सूरत तो किसी को मुराद चाहिए

किसी को सलह तो किसी को साथ चाहिए

किसी को पंख तो किसी को उड़ान चाहिए


तुम मेरी वो नज़्म थी

जिसे शब्दो से अपनी दिल-ऐ-जज़्बात बताता था

जिसे चूम लू तो एक खूबसूरत सा चाँद नज़र आता था

जिसे बाँहे फैलाये खुद में समां लू वो बरसात सा नज़र आता था

जिसे रख लू महफूज़ इन शब्दों में वो कोरे पन्नो पर खूबसूरत नज़्म बनकर आता था।।


चुनो उन्हें जो जिस्म से पहले रूह चुने

जो हाठो से पहले हाथ चूमे

जो दुआओ में तुम्हे पाने की मुराद करे

जो ग़ुरूब-ऐ-अफ्ताब से लेकर तुलु-ऐ-अफताब तक तुम्हारे होने का शुक्रगुजार करे

जो हर लिखती नज़्म में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा ही ऐतबार करे

चुनो उन्हें जो कफ़न में फनाह होकर भी सिर्फ तुम्हे ही चुने।।


न जिस्म की बूख थी

न हवस की आग थी

न तुम्हारे प्यार की आदत थी

न तुम्हारे गुस्से की इज्ज़ातत थी

न तुमसे शामें मांगी

न तुमसे राते मांगी

न तुम वफ़ा कर पाई

न तुम बेवफा बन पाई


लेकिन......


मलाल तुम्हारे ईश्क़ का है

मलाल तुम्हारे वादों का है

मलाल तुम्हारे होठो पर मुस्कुराहटों का है

मलाल तुम्हारे साथ बिताएं लम्हो का है

मलाल तुम्हारे आंसूओ को पीने का है


मलाल कई चीज़ों का है,पर मुराद सिर्फ मुहब्बत की थी... न तुमसे मलाल हुआ और न हमसे मोहब्बत।।।।