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तेरी प्रीत


चाह है!!रहूं बनकर तेरा मीत,

कैसे भूल जाऊ सहज सी तेरी प्रीत।चित्त में तेरी सिर्फ गुनगुनाता हूं गीत,

सादगी से मिलता नहीं यही हैजग की रीत |

— सहज प्रीत
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