चाह है!!रहूं बनकर तेरा मीत,कैसे भूल जाऊ सहज सी तेरी प्रीत।चित्त में तेरी सिर्फ गुनगुनाता हूं गीत,सादगी से मिलता नहीं यही हैजग की रीत |
चाह है!!रहूं बनकर तेरा मीत,
कैसे भूल जाऊ सहज सी तेरी प्रीत।चित्त में तेरी सिर्फ गुनगुनाता हूं गीत,
सादगी से मिलता नहीं यही हैजग की रीत |