यकीं तुझपर भी अब रहा नहीं

क्योंकि तुमने भी अपना वादा निभाया नहीं,

बड़े जोर शोर से अपनी अखलियत का

ढिंढोरा पीटा,

पर हकीकत में कुछ निभाया नहीं तुमने ।

एक विश्वास की डोर जो जुड़ी थी तुमसे

अब उसके बंधन एक एक कर खुलने लगे,

हमने तो औरों से बेहतर माना तुमको

पर हम खुद को गलत साबित कर लिए ।।