आज मैं विस्थापित हो गया अपने मकाम से

कुछ नए लोगों के साथ रहने के नाम से

इंसान के हालात कुछ नए सबक दे जाते हैं

जो सोचा नहीं था कभी वो सच हो जाते हैं ।

अपने परिवार से दूर कुछ अकेलेपन का एहसास

एक उदासी भरा आलम सिर्फ अकेलापन

अपने पास,

जिंदगी हर कदम पर चुनौतियों का समंदर

इसमें जितना उतरे उतना इसके अंदर ।

जो हो रहा है उसे होने दो ईश्वर की मर्जी है

उसको बदल पाना नामुमकिन बस अपनी

खुदगर्जी है ।।