दूर क्षितिज पर तारा टूटा,
आसमान का दिल गया रूठा,
अपना एक बिखर गया साथी,
सौर मंडल का भ्रम हुआ झूठा,
सबके नियति की यही कहानी,
एक दिन टूटेगी अभिमानी,
सौर मंडल हो या भूमंडल या फिर
मानव मंडल,
अपने अपने नियति समय पर टूट कर
गिर जाना है मिट जाना है आभामंडल ।।

