मैं सूखा पेड़ हूं

ना मैं फल दे सकता ना छाया

मैं निर्जीव निरर्थक मेरी काया

मुझे काटकर जला दो

काम से कम ईंधन के काम आ जाऊं ।

जब मैं जवान था

हरे भरे पत्ते फूल फल से लदा रहता था

दिन रात लोग मेरे नीचे बैठ मेरे मीठे फल

खाया करते थे

मुझमें भी अहंकार था अब कोई मेरे

पास नहीं आता ,

मैं सुख गया बूढ़ा हो गया ।

मैं एक सूखा पेड़ हूं, एक बोझ हूं इस

जमीन पर

मुझे काट कर जला दो,

यही मेरी अंतिम इच्छा है पूरा कर दो ।।