प्रजातंत्र के मंदिर में राजतंत्र का प्रतीक

राजा प्रजा का संबंध नहीं ये जनतंत्र का पीठ

संसद में स्थापित कर राजतंत्र का आह्वान

प्रजातंत्र के मंदिर को राजतंत्र का गुणगान ।

सत्ता जनमत से मिलती है जनता का धनमान

फिर सत्ता क्यों सोचती है खुद का राजविधान

लोकतंत्र के लोकशाही का राजधर्म का ज्ञान

राजा जनता का मत है सत्ता सेवक का संविधान ।

नीति रीति से गर्वित होगा अपना संविधान

सबके मौलिक अधिकारों का रक्षा का विधान

भेद भाव ना हो कभी मानव मानवता का सम्मान

सत्ता प्रजा का हित करे संसद का एक विधान ।।