राज सत्ता के लिए बेचैन नेता
भाषा की मर्यादा तोड़ते नेता
सर्वोच्च स्थान पर बैठने वाले लोग
सड़कछाप शब्दों से भाषण करतें
अवाम क्या करे किसको राजा बनाए
जब कोई व्यक्ति आत्मज्ञान नहीं
ना खुद का ना दूसरों सम्मान नहीं
संस्कारों की अर्थी पर सवार खुद
संस्कार और सनातन की बात करते हैं
अपने ही शब्दों से खुद को घायल करते हैं ।
Posted bySahdeosingh