फूल बनकर सदा यूं ही खिलते रहो,
अपने खुशबू से उपवन में महकते रहो,
हर मुश्किलों में यूं ही मुस्कराते रहो,
आंखे नम भी रहें तो गम पीते रहो ।
जिंदगी के हर फैसले को समझो तोहफा,
जिंदगी कभी होती नहीं बेवफा,
गरल को मान पी लो अमृत सुधा,
नीलकंठ बनकर यूं ही मुस्कराते रहो ।
फूल बनकर सदा यूं ही खिलते रहो ।।

