फासले रखें मगर नजदीकियां नजर
आती रहें,
औरों के लिए रिश्ते में कोई दूरी ना
एहसास हो कभी,
रिश्तों की मर्यादा अपने सम्मान का प्रतिबिंब है
बिखर गया वो बिंब तो,
फिर रिश्ता निंद है,
फासले बढ़ते हैं सोच के अंतर्विरोध में
विश्वास गर हो अगर तो रिश्ते ना कमजोर हों ।।

