फासला दिलों में इस कदर बढ़ गया है
इंसान इंसानियत का फलसफा भूल गया,
क्या बदला है समाज की सोच यूं कि
नफरतों का बवंडर हर तरफ छा गया है,
ना इंसानों में ना इंसानियत बची
मर गई भावनाएं स्वार्थ में यूं फंसी
आपस में लड़ रहे खून के प्यासे हुए
इंसान वहशी दरिंदा हुए
ना शर्म लाज ना कोई इंसानियत बची
आपस में लड़ रहे एक वहशत मची ,
छोड़ो नफरत इंसानियत का संदेश दो
मिटाओ फासले दिलों के प्रेम का रंग भर दो ।।

