फैसला छोड़ दो हम पर

हम ही न्याय करेंगे कौन सच्चा कौन झूठा

किस पर एतबार करेंगे,

बदलना होगा सियासत की कुछ तस्वीरें

जो एक छलावा ही बन गई,

जो महसूस कर रहा अपनी कमियां

वो हमें मंजूर हो गई

सरकारें वादा करती है हमे गुमराह करती

ना हासिल हुआ कुछ बेहतर बस

इकरार करती हैं ।

जनमत में सदा ही ईमानदारी की तरफदारी

अगर धोखा है गर तो नहीं अबकी

तुम्हारी बारी ।।