किसी को दौलत का नशा,
किसी को सत्ता का नशा,
कोई मधुशाला में नशेमन हो कर गिरा,
नशा में डूबे हैं हम सब
अपने ख्वाहिश के लिए,
नशा कोई भी हो खो देती है होशो हवास,
ध्यान भटक जाता है ,
खो जाता है इंसानियत का मिजाज,
नशा कोई भी हो बेतकल्लुफ ना हो,
होश इतना तो रहे इंसान बन के रहे ।।

