मुसाफिर हैं हम सब ,
कब तक रहेंगे ना कोई ठिकाना,
एक दिन चले जाना है ।
ए रिश्ते नाते यहीं रह जायेंगे,
बस अपनी यादों को छोड़ जाना है ।
ये दौलत ए शोहरत ये माया की लालच,
सब छोड़ जाना है ।
मुसाफिर हैं हम सब,
एक दिन चले जाना है ।।


मुसाफिर हैं हम सब ,
कब तक रहेंगे ना कोई ठिकाना,
एक दिन चले जाना है ।
ए रिश्ते नाते यहीं रह जायेंगे,
बस अपनी यादों को छोड़ जाना है ।
ये दौलत ए शोहरत ये माया की लालच,
सब छोड़ जाना है ।
मुसाफिर हैं हम सब,
एक दिन चले जाना है ।।