भूख और गरीबी के गुलाम हो गए
अवाम अब मजबूरी का शिकार हो गए
दो वक्त की रोटी के लिए शासन पर हैं निर्भर
आत्मसम्मान खोकर गुलाम हो गए ।
मेहनत ना कर सके ये कैसी है फितरत
आलस और कामचोरी की अवाम है मूरत
कब तक चलेगा मुफ्त खाने का सिलसिला
जब खुद का जमीर नीलाम हो गए ।
अपने ही पैरों में ना बांधों बेड़ियां
खुद के मेहनत से कमाओ रोटियां
अपने पसीने की कीमत को समझ कर
आत्मसम्मान की कमाई से बांटो हर खुशियां ।।


