अपने अपने दुखों से परेशान है हर इंसान

एक पल का तो सुकून लेने दो

मुझे भी जी लेने दो ।

दौलत शोहरत की दौड़ में दौड़ते हैं दिन रात

नहीं कोई चैन मशीन हो गए हैं आज

इस होड़ की दौड़ से अलग होने दो

मुझे भी जी लेने दो ।

हसरतें हजारों हैं हम सबमें

बुलंदियों की चाह है हम सबमें

स्वच्छंद परिंदे की उड़ान भरने दो

मुझे भी जी लेने दो ।

आसमान को मुट्ठी में कैद करने की चाह

अपरिमित हसरतों की आह

इस चाह की आह से कुछ पल का

सुकून लेने दो

मुझे भी जी लेने दो ।।