मुद्दातों लग जाते हैं पहचान बनाने में,

एक छोटी सी लापरवाही कारण बन जाती है,

जिल्लत पाने में,

हर इंसान जी जान लगा देता है,

अपना नाम कमाने में,

अहंकार और व्यभिचार का जुनून

अपराधी बनाकर पहुंचा देता है

जेलखाने में ।

मुकाम बनाने में मुद्दतों का वक्त लगता है,

इस मुकाम पर ठहरने के लिए संयम शील

रहना पड़ता है ।।