बार बार हर बार मुझे चोट लगती है

वक्त के इस बेरुखी से बेबस जिंदगी

लगती है

जितना हौसला से मैं आगे बढ़ता हूं

फिर नई चोट का सामना करता हूं,

हाथ पांव की ताकत तो पहले छिन

लिया,

ना जाने किस गुनाह का अंजाम दिया

हौसला भी मेरा अब टूटने लगा है

जिंदगी की बेबसी से दर लगने लगा है ।।