मेरे हालात कुछ यूं हो गए है

कुछ समझ नही आ रहा ये क्यूं हो गए है

उलझा हुआ हूं दवाइयों के जाल में

बनाती बिगड़ती तबियत से बेहाल हूं ।

जीवन में जैसे एक घटातोप अंधेरा छा गया

उम्मीद टूट रही है ऐसा दिन आ गया

सोचता हूं कब फिर चलने लगूंगा

जीवन के इस उलझनों से निजात पाऊंगा ।

उम्मीद है जीवन के इन उलझनों से जीत जाऊंगा

फिर से अपने मंजिल पर आगे बढ़ जाऊंगा ।।