पाप नाशीनी मां गंगा ,

शिव के जटा से निकली ,

धरती की प्यास बुझाने आयी,

मानव के कल्याण हेतु ,

राजा भगीरथ ने शिव आशीष पाई,

सबके पापों का नाश करती,

मानव जीवन को निर्मल करती,

जीवन के अंतिम प्रयाण में,

स्वर्ग द्वार का अमृत फल देती,

हिमालय से चलती कल कल धारा,

धरती मां के फैले जमीन को,

अमृत धारा से प्यास बुझाती,

मानव जीवन के कल्याण हेतु सदियों

से हैं प्यास बुझाती ।।

जय जय मां गंगे तुमको शत शत नमन ।।