कोई आवाज सुनाई देती नहीं किसी को

या फिर बहरे हो गए सभी,

बातें करते हैं बड़ी बड़ी रोज

पर सुधार लाते क्यों नहीं,

समाज का हर तबका अगर बातें ही करेगा

तो आवाज उठाएगा कौन,

संस्थाएं चुप चाप बैठी हैं तो

विरोध जताएगा कौन,

यह मौन ही सबसे बड़ी त्रासदी है,

मौन को तोड़ना होगा आवाज की गूंज

सुनाई देनी होगी ।।