खुदगर्जी के इस आलम में

इंसान भरोसा किस पर करे,

इंसान इंसान को धोखा दे रहा

झूठ फरेब के जाल में उलझा रहा

क्या करे किससे फरियाद करे,

जब हमारा मुंसिफ ही बहरा है ।

जब विश्वास पर आघात हुआ है

समाज में एक तनाव और नफरत

का माहौल पैदा हुआ है ।

झूठ फरेब के कुचक्र से कब तक

उलझाओगे,

एक दिन मुखौटा उतर जायेगा

हकीकत की तस्वीर कब तक छिपाओगे ।।