कांटों पर चलोगे तो कांटा ही चुभेगा
तुम्हारे दर्द की दवा तो तुम्ही से मिलेगा,
किसी और के सहारे पर दवा नहीं मयस्सर
तुम्हारे पांव का कांटा तुम्हीं से निकलेगा ।
फूलों के पांवड़े बिछे होते नहीं हर डगर
कहीं ऊबड़ खाबड़ रास्ते कहीं नुकीले पत्थर
चलते ही रहना नाम है जिंदगी
रुक गए तो बेजान जिंदगी ।।

