इंसान की हसरतें कभी पूरी
नहीं होती
दरख़्त के नए पत्तों की तरह
रोज नए निकल आते हैं
फिर नई ख्वाहिशों के भंवरजाल
में इंसान उलझ जाता है
अपनी इच्छाओं के समंदर में
गोते लगाता रहता है
कभी सुकून नहीं पाता ।
यही ख्वाहिशें जीवन को गतिशील
रखती हैं
जब तक सांस है प्रयास करता है ।।


