गुमराह कर रहें हैं जिन पर जनता का भार था

बिक गए सरे बाजार ये जनतंत्र का बाजार था

होड़ है टी आर पी की मीडिया के बाजार में

तीखी बहस में उलझी जनता इस कारोबार में ।

नफरती अल्फाज से टकराते धर्म के ठेकेदार

आपस में नफरत का बीज फैलाते हर घर बार

सत्ता की चाटुकरता में मिलता इनाम है

ईमानदारी की पत्रकारिता हो गई कंगाल है ।।