घात लगाये बैठा है

शिकार के तलाश में,

आंखे गडी हुई हैं अपने

आहार के आस में ।

हर निर्बल सबल का शिकार

मात्र है,

अपने बल का इस्तेमाल

मात्र है ।

कुदरत की इनायत है

जिसमें घात की सियासत,

इंसान हो या जानवर

सबमें घात की विरासत ।।

Posted by

Sahdeosingh