एक शून्य में घिरा हूं
बेरंग जिंदगी
चाहते दम तोड रही
आशाएं भी नहीं,
हर इंसान खौफजदा है
मायूस है फिजा
कैसी भी नीरस हो गई
अब आम जिंदगी ।
कुछ लोग खुशियां बांट रहे
इस शहर के हर घर गली में
इन मसखरों की जाल में उलझी
है आम जिंदगी ।।

एक शून्य में घिरा हूं
बेरंग जिंदगी
चाहते दम तोड रही
आशाएं भी नहीं,
हर इंसान खौफजदा है
मायूस है फिजा
कैसी भी नीरस हो गई
अब आम जिंदगी ।
कुछ लोग खुशियां बांट रहे
इस शहर के हर घर गली में
इन मसखरों की जाल में उलझी
है आम जिंदगी ।।