उम्र गुजर जाती है एक घर बनाने में

उन्हें एक पल नहीं लगता उसे जलाने में

वो कौन हैं जिनके दिलों में नफरत

इंसानियत के लिए सुलग रही है

क्या वो इंसान नहीं जिनके दिलों में

नफरत की चिंगारी सुलग रही है ।

रहम करो आम अवाम पर जो जीने की

जद्दोजहद में गाफिल है

जरा उनके बारे में सोचो जिनके घरों

में दो वक्त का राशन भी नहीं मयस्सर है ।

मत करो बदनाम इंसानियत एक रिश्ता है

इंसान ही इंसान के लिए फरिश्ता है ।।