फिजा में गूंजती सदा एक आवाज
कानों के पास आ आकर कहती है एक सदा,
इंसान हो तुम सब फिर इंसान बनकर क्यों नहीं
प्यार और समर्पण का जज्बा अब नहीं,
जहां गीत संगीत की स्वर लहरियां
गूंजती थी,
नवयौवनाओं के अठखेलियां से फिजाएं
महकती थी,
हर चेहरे पर जीवन की मधुर मुस्कान
लरजती थी,
वो प्यार वो जीवन का समां खो गया कहां ।।


