एक दबी चिंगारी सुलग रही आहिस्ता आहिस्ता

जिसके धुंए की जद में अवाम सिमट रही है,

जिस दिन ये सुलग गई हर अवाम के दिलों में

उस कयामत से बच पाना बड़ा मुश्किल होगा,

भूख की आग वो खतरनाक मंजर है,

जिसमें ईमान भी कौड़ियों में बिक जाता है

एक रोटी की चाहत की आहत से

बड़े बड़े बादशाहों का राजमहल खंडहर

बन जाता है ।।