चुनावी वादे जनता को लुभाने का
सत्ता में आने का हथकंडा है,
अब तो चुनाव जीतने के लिए
सियासतदानों का गोरखधंधा है,
सत्ता के कुर्सी तक पहुंचने का एक
जुमला है,
सत्ता में आते ही भूल जाने का
इमला है,
ये वादे चुनावी है इनमें हकीकत नहीं
सियासत के हुक्मरानों का कोई नीयत नहीं ।
जनता से वोट लेने का एक योजना
पांच साल सत्ता में रहने की लुभावनी
परियोजना ।।

