संविधान का चौथा खंभा अपंग हो गया

जनता के सरोकार से दूर हो गया

जिसकी जिम्मेदारी थी सच दिखाने की

बाजार में तब्दील हो गया,

प्रचार पैसा के खेल में चौथा खंभा

सियासत का टूल बन गया,

खबरें सच का आइना थीं

अब खबरें सियासत और सत्ता का

हथियार बन गया ।

जब अर्थ के इस दुनिया में अर्थ ही अस्तित्व

है तो सच तो अर्थ के तंत्र का भ्रष्टतंत्र बन गया ।।