शीशा टूट जाने के बाद जोड़ा
नहीं जा सकता,
समय गुजर जाने के बाद वापस
लौटाया नहीं जा सकता,
भूल जाना ही बेहतर है उन बातों को
जिन्हें पाया नहीं जा सकता ।
समय के साथ रेत सी फिसलती जाती
है जिंदगी,
उन गुजरे लम्हों का शीशमहल फिर
से बनाया नहीं जा सकता ।।


शीशा टूट जाने के बाद जोड़ा
नहीं जा सकता,
समय गुजर जाने के बाद वापस
लौटाया नहीं जा सकता,
भूल जाना ही बेहतर है उन बातों को
जिन्हें पाया नहीं जा सकता ।
समय के साथ रेत सी फिसलती जाती
है जिंदगी,
उन गुजरे लम्हों का शीशमहल फिर
से बनाया नहीं जा सकता ।।