बेनाम सा दर्द बार बार नए रूप

में क्यों आता

क्यों मेरी जिंदगी से दूर क्यों नहीं जाता

हर रोज मेरे मन को बेचैन क्यों करता

नए नए रूप मुझे एक नया दर्द देता,

गुजारिश है तुमसे क्यों ठहर गया है

अब हो गया बहुत गुजर क्यों नहीं जाता

बेनाम सा ये दर्द नए नए रूप में क्यों आता ।।