बड़ा बेदर्द जमाना है जो सपनों पर
चोट भी करता है,
और विरोध करने पर मुलजिम भी
बनाता है,
क्या कसूर है हमारा जो हमें ये सजा मिली
देश सेवा के जज्बे के बदले,
चार साल की मुद्दत मिली,
हमारे अरमानों को सियासत का मोहरा
बनाया,
हमारे राष्ट्र प्रेम की भावनाओं को गुनाहगार
बताया ।।

