जब तरुवर से पत्ते गिरते

पतझड़ बसंत का संदेश देते

प्रकृति मौसम की सूचक है

परिवर्तन की झलक कहते,

अब नई कोपालें फूटेंगी,

हरे भरे इन तरुवर पर

मधुमास बन छा जाएगा इन

उपवन के हर फूलों पर,

महक उठेगी धरा सुहानी,

भौरों की गुन गुन सुनकर,

बहे बसंत बयार सुहानी,

प्रकृति की यौवन दीवानी,

दिग दिगंत में फेल रही है

प्रकृति यौवन की मधुरस बानी ।।