बांट दिया सियासत ने हमें

जाति धर्म छूत अछूत के नाम पर

सत्ता की चौसड़ पर मोहरा बना दिया

इस देश की अवाम को ।

एक लकीर बन गई सियासत की

धर्म मजहब मंदिर मस्जिद के नाम की

वोट बैंक के खाते में जुड़ गए लोग

जाति धर्म के नाम पर ,

इस सियासत के चक्रव्यूह में उलझ

कर रह गए,

समझते हैं लोग मगर मूक वोटर रह गए,

राजनीति का यह स्वरूप जन कल्याण

तो नहीं,

राजा के लिए राजधर्म यह नहीं ।।