तूं अपने बज्म में इतना मशगूल हो गया
तेरा कारवां लूट गया तुझे एहसास नहीं
अपने मशरूफियत का तूं ही हकीकत है
गफलत में तूं भटकता रहा यूं ही ।
जो तेरे हबीब थे वो तेरे साथ से छोड़ गए
तूं अब यूं ही एक नाचीज़ बन कर रह गया
अपने ही ख्वाहिशों के कब्र पर आंसू बहाने से
उन बीते हुए लमहों को वापस पा नहीं सकता ।।

