कुछ चेहरे सफलता की मुस्कान लिए

कुछ निराशा और अपमान से आहत

सियासत और सत्ता की टकराहट से

आम अवाम की दुश्वारियों से बेखबर,

अपने शानो शौकत में खुद को डुबोया

अपना रहबर,

फिर कौन करेगा इंसाफ उनसे जो जुल्म

के शिकार है,

जो रहनुमा बना बैठा वही कातिल भी है

वही पालनहार है,

गजब की कशमकश में फंसे हैं वो जो

अपनी आवाज को बुलंद करना चाहते हैं

अपने वजूद और सम्मान के लिए इंसाफ

मांगते हैं ।

लोकतंत्र राजतंत्र या जनतंत्र के अधिकारों

का हनन,

संविधान और न्याय का शर्मनाक दामन ???