"आशाएं "
ये वीरानियां ये रंजो गम के साये,
कब तक दिल में महफ़ूज रहेंगी,ना छोडती हैं मेरे दामन को,
ना दिल को तसल्ली देती ,
हर पल मेरे होशो हवास पर,
काबिज रहकर मेरे जज्बात,
को अंधेरे में छिपाये रखती,
कभी तो इनका अहंकार टूटेगा,
एक नयी रोशनी का झोंका आयेगा,
फिर से खुशियों का अंकुर फूटेगा ।।

