अपने सवालों में उलझे रहे तो औरों से क्या वास्ता

दुनिया के उलझनों में उलझे भला क्यों

जब अपना नहीं है पता,

खुद के वजूद के लिए लड़ता रहा

पर हासिल कुछ भी ना हुआ,

लोगों के आंखों में सवाल बन खड़ा मैं

ऐसी है मेरी वफा ।

खुद ना बदला जमाने के रंग में

बस इतना है मेरी खता ।।